बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए शुक्रवार को हुए मतदान में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं ने शानदार उत्साह दिखाया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय से जारी शाम 4 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, शिक्षक सीटों पर 74.55 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि स्नातक सीटों पर यह आंकड़ा 43.87 प्रतिशत रहा। रिपोर्टों के अनुसार, ये आंकड़े मतदान समाप्ति के समय के हैं — चार बजे के बाद कतार में खड़े मतदाताओं के वोट डालने से अंतिम संख्या में मामूली बदलाव संभव है। इन आठ सीटों के नतीजे 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद सामने आएंगे।
शिक्षक सीटों पर 74.55 प्रतिशत: सारण सबसे आगे
चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सारण में सबसे अधिक 87.16 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। इसके बाद दरभंगा में 79 प्रतिशत, तिरहुत में 78.10 प्रतिशत और पटना में 56.89 प्रतिशत मतदान हुआ।
इतनी ऊंची मतदान दर का बड़ा कारण इन सीटों का मतदाता वर्ग है। रिपोर्टों के अनुसार, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 40,253 मतदाता हैं — यानी स्नातक सीटों के 4,92,594 मतदाताओं के मुकाबले करीब बारह गुना छोटा और अधिक संगठित मतदाता समूह। शिक्षक संगठनों की सक्रियता और सेवा-शर्तों से जुड़े मुद्दों के चलते इस वर्ग में मतदान की जागरूकता हमेशा अधिक रहती है, और छोटे निर्वाचक मंडल में हर वोट का वजन भी बढ़ जाता है।
स्नातक सीटों पर 43.87 प्रतिशत: कोसी सबसे ऊपर
चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में कोसी में सबसे अधिक 52.51 प्रतिशत मतदान हुआ। तिरहुत में 42.15 प्रतिशत, दरभंगा में 42 प्रतिशत और पटना में 36.19 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
स्नातक सीटों पर अपेक्षाकृत कम मतदान का पैटर्न नया नहीं है। यह मतदाता वर्ग भौगोलिक रूप से बिखरा होता है और किसी एक संगठन के बैनर तले जुटना उसके लिए मुश्किल होता है। फिर भी कोसी का 52.51 प्रतिशत आंकड़ा बताता है कि कुछ क्षेत्रों में मुकाबला कांटे का है — और ऐसी सीटों पर कम मतदान भी नतीजे पलटने की ताकत रखता है।
मोकामा में झड़प, पटना में आतिशबाजी
शाम को मोकामा से तनाव की खबर आई। रिपोर्टों के अनुसार, जन सुराज उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थकों और निवर्तमान सदस्य नीरज कुमार के समर्थकों के बीच झड़प हुई। खास बात यह है कि अनुज सिंह को जद(यू) विधायक अनंत सिंह का समर्थन हासिल है — यानी सत्ताधारी जद(यू) के एक विधायक अपनी ही पार्टी के निवर्तमान सदस्य के खिलाफ उतरे उम्मीदवार के साथ खड़े हैं। पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें अनंत सिंह के करीबी छोटू सिंह भी शामिल हैं।
दूसरी ओर, पटना में अनंत सिंह के आवास के बाहर आतिशबाजी की खबरें आईं — उनके समर्थक अनुज सिंह की जीत का जश्न मना रहे थे। हालांकि 27 अक्टूबर से पहले नतीजे किसी को पता नहीं हैं, यह नजारा पटना शिक्षक सीट पर मुकाबले की तीव्रता जरूर बयान करता है।
तेजस्वी यादव के दावे और 13 शिकायतें
राजद नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया कि विपक्ष सभी आठ सीटें जीतेगा। उन्होंने मतदान के दौरान वोट चोरी, फर्जी मतदाताओं और प्रशासन के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है — इन्हें उनके दावों के तौर पर ही लिया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, पटना शिक्षक सीट से भाजपा के निवर्तमान सदस्य नवल किशोर यादव ने निर्णायक जीत का दावा किया है। रिपोर्टों के अनुसार, वे पिछले 30 वर्षों में पांच बार इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं — ऐसे में उनकी यह सीट परंपरागत रूप से सबसे प्रतिष्ठापूर्ण मानी जाती है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल के कार्यालय के अनुसार, मतदान के दौरान 13 शिकायतें मिलीं, जिनका निपटारा कर दिया गया।
27 अक्टूबर को मतगणना: क्या देखना होगा
कुल 933 मतदान केंद्रों पर 5,32,847 मतदाताओं के लिए यह चुनाव हुआ, जिसमें 150 उम्मीदवार (90 स्नातक और 60 शिक्षक सीटों पर) मैदान में हैं। मतदान सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक चला।
27 अक्टूबर की मतगणना से साफ होगा कि उच्च सदन की इन आठ सीटों पर किस दल का दबदबा रहेगा। खास नजर पटना शिक्षक सीट पर होगी, जहां निवर्तमान नीरज कुमार और अनंत सिंह समर्थित अनुज सिंह के बीच सीधी टक्कर है। शिक्षक सीटों पर ऊंचा मतदान आम तौर पर बदलाव की लहर का संकेत माना जाता है, लेकिन अंतिम फैसला मतपेटियों से ही निकलेगा।
चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट द प्रिंट और ईटीवी भारत की खबरों से सत्यापित की गई है।
सुबह की मतदान कवरेज यहां पढ़ें: बिहार MLC चुनाव: मतदान दिवस की पूरी जानकारी। इसी दिन की अन्य बड़ी खबरें: परकाला प्रभाकर का SIR विरोधी मार्च और परिसीमन विधेयक: 50 प्रतिशत सीट वृद्धि पर DMK से बातचीत।
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