केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार, 25 अक्टूबर को बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्वोत्तर भारत में एक अंतरराष्ट्रीय नशा तस्कर गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' नाम की इस कार्रवाई में असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ 38 जगहों पर छापे मारे गए, 18 लोग गिरफ्तार किए गए और करीब 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता चला। छापे 23 अक्टूबर को मारे गए थे और उनका ब्योरा 25 अक्टूबर को सार्वजनिक किया गया।
ऑपरेशन ट्राइडेंट में क्या-क्या मिला
रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्रवाई में 1,424 बैंक खाते फ्रीज किए गए, 17.82 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गईं, 500 डेटोनेटर बरामद हुए और 12 लाख रुपये नकद मिले। गृह मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि केंद्र सरकार और तीनों राज्यों की पुलिस ने मिलकर इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह को ध्वस्त किया है। उन्होंने इसे नशे के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का एक और बड़ा झटका बताया।
यह आंकड़े इसलिए अहम हैं क्योंकि ये सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं हैं। बैंक खातों को फ्रीज करना और हवाला के रास्ते का पता लगाना यह दिखाता है कि एजेंसियों ने इस बार गिरोह के पैसे के नेटवर्क पर भी चोट की है। नशे का कारोबार बिना पैसे के लेनदेन के नहीं चलता, इसलिए वित्तीय जांच अक्सर गिरोह की कमर तोड़ने का सबसे असरदार तरीका मानी जाती है।
डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर क्या है
गृह मंत्री के अनुसार, यह गिरोह भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के बीच नशे की तस्करी करता था। उन्होंने इस रास्ते को 'डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर' कहा। यह वही इलाका है जिसे पहले 'गोल्डन ट्रायंगल' के नाम से जाना जाता था। भारत सरकार अब जानबूझकर इसे 'डेथ ट्रायंगल' कहती है, ताकि इस कारोबार से जुड़ी किसी भी तरह की चमक खत्म हो और यह साफ रहे कि इसका नतीजा मौत, लत और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है।
पूर्वोत्तर की भौगोलिक स्थिति इस समस्या को और कठिन बनाती है। म्यांमार और बांग्लादेश से लगी लंबी और छिद्रिल सीमाएं तस्करों को रास्ता देती हैं। इसीलिए इस तरह की कार्रवाई में केंद्रीय एजेंसियों के साथ-साथ तीनों राज्यों की पुलिस का एक साथ काम करना जरूरी होता है। एक राज्य में छापा मारने से गिरोह दूसरे राज्य में खिसक सकता है, लेकिन एक साथ 38 जगहों पर कार्रवाई से उसके बचने की गुंजाइश कम हो जाती है।
2029 की डेडलाइन से कैसे जुड़ा है यह ऑपरेशन
गृह मंत्री ने इससे पहले 21 अक्टूबर को राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर कहा था कि केंद्र सरकार 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशा मुक्त बनाना चाहती है। ऑपरेशन ट्राइडेंट उसी अभियान की एक कड़ी के रूप में पेश किया गया है। शाह ने कहा कि सरकार तब तक कार्रवाई करती रहेगी जब तक नशा गिरोहों का आखिरी नेटवर्क खत्म नहीं हो जाता।
यहां एक बात साफ रखनी चाहिए। 2029 की डेडलाइन सरकार का लक्ष्य है, कोई गारंटी नहीं। नशे का कारोबार अंतरराष्ट्रीय है और इसके स्रोत देश की सीमा के बाहर भी हैं, इसलिए सिर्फ भारत के अंदर छापों से यह पूरी तरह खत्म नहीं होगा। लेकिन वित्तीय नेटवर्क पर चोट, जैसा कि इस ऑपरेशन में दिखा, एक ऐसी रणनीति है जो लंबे समय में गिरोहों को कमजोर कर सकती है।
आगे क्या होगा
गिरफ्तार लोगों के खिलाफ जांच अब आगे बढ़ेगी। आम तौर पर ऐसी कार्रवाइयों के बाद एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करती हैं कि हवाला के पैसे कहां से आए, किन खातों से होकर गुजरे और इस नेटवर्क से और कौन-कौन जुड़ा है। अदालत की प्रक्रिया और आरोपपत्र के बारे में अभी आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। इसलिए इस मामले में किसी व्यक्ति के अपराध के बारे में अंतिम निष्कर्ष तभी निकाला जा सकता है जब जांच और अदालत की कार्रवाई पूरी हो।
पूर्वोत्तर के लिहाज से यह कार्रवाई एक संदेश भी है। नशे की लत से सबसे ज्यादा नुकसान युवाओं और सीमावर्ती समुदायों को होता है। हर बड़ा ऑपरेशन इस समस्या को खत्म नहीं करता, लेकिन यह दिखाता है कि इस कारोबार के पैसे और रास्ते पर नजर रखी जा रही है।
स्रोत: New Indian Express, Deccan Herald
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