SEBI to Review Short-Selling and Securities Lending Rules: What Changes for Investors

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी अब शेयर बाजार के एक अहम नियम की समीक्षा करने जा रहा है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 24 अक्टूबर को मुंबई में कहा कि शॉर्ट सेलिंग और सिक्योरिटी लेंडिंग यानी एसएलबी के नियमों की समीक्षा की जाएगी, ताकि बाजार में तरलता बढ़े और कीमतों का सही पता चल सके। यह ऐलान 16वें अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार सम्मेलन में किया गया, जिसका आयोजन एनएसई सदस्यों के संगठन एएनएमआई ने किया था।

मुंबई के ट्रेडिंग हॉल में बड़ी स्क्रीन पर ऊपर जाता चार्ट दिखाता प्रतीकात्मक चित्रण

सेबी ने क्या ऐलान किया

रिपोर्टों के अनुसार, सेबी की समीक्षा का मकसद शॉर्ट सेलिंग और एसएलबी की व्यवस्था को बेहतर बनाना है। इसके साथ ही सेबी ट्रेडिंग टर्मिनल के गलत इस्तेमाल पर रोक के लिए सुरक्षा उपाय भी मजबूत करना चाहता है। ब्रोकरों के लिए उनकी आकार और जोखिम के हिसाब से अलग-अलग अनुपालन नियमों पर भी विचार हो रहा है, जिसे ग्रेडेड अनुपालन कहा जा रहा है।

इसके अलावा सेबी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए एक सैंडबॉक्स बनाने की योजना पर भी काम कर रहा है, जहां कंपनियां नए एआई टूल को नियंत्रित माहौल में परख सकेंगी। कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में मेकिंग की व्यवस्था भी लाने की बात कही गई है, ताकि बॉन्ड की खरीद-बिक्री आसान हो। ये सभी कदम एक ही दिशा में हैं: बाजार को गहरा और भरोसेमंद बनाना।

शॉर्ट सेलिंग और एसएलबी क्या होते हैं

शॉर्ट सेलिंग में निवेशक वह शेयर बेचता है जो उसके पास उस समय नहीं होता। उम्मीद यह होती है कि शेयर की कीमत गिरेगी और वह उसे बाद में कम दाम पर खरीदकर अपना सौदा पूरा कर लेगा। इस प्रक्रिया के लिए शेयर उधार लेने की जरूरत होती है, और यहीं एसएलबी काम आता है। एसएलबी के तहत निवेशक एक संगठित व्यवस्था से शेयर उधार ले सकते हैं, ताकि शॉर्ट सेलिंग नियमों के दायरे में हो सके।

आम भाषा में समझें तो शॉर्ट सेलिंग बाजार को दो तरफा बनाती है। जब सिर्फ खरीदने वाले होते हैं, तो कीमतें एक ही दिशा में बढ़ती हैं। जब बेचने वाले भी नियमों के तहत मौजूद होते हैं, तो किसी शेयर की कीमत उसकी असलियत के ज्यादा करीब आ सकती है। लेकिन इसमें जोखिम भी बड़ा है। अगर शेयर की कीमत गिरने की बजाय बढ़ जाए, तो शॉर्ट सेलर को महंगे दाम पर शेयर खरीदना पड़ता है और नुकसान असीमित हो सकता है। इसीलिए शॉर्ट सेलिंग आम निवेशकों के लिए नहीं, बल्कि समझदार और जोखिम उठाने में सक्षम निवेशकों के लिए मानी जाती है।

आम निवेशक पर क्या असर पड़ेगा

अगर समीक्षा के बाद नियम आसान और पारदर्शी होते हैं, तो इसका सीधा फायदा बाजार की तरलता को होगा। तरलता का मतलब है कि शेयर को बिना कीमत को ज्यादा हिलाए खरीदा या बेचा जा सके। ज्यादा तरलता से छोटे निवेशकों को भी बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ती है। साथ ही, कीमतों का सही पता चलने से बाजार में हेरफेर की गुंजाइश कम होती है।

लेकिन यहां एक सावधानी जरूरी है। अभी यह सिर्फ समीक्षा का ऐलान है। सेबी ने न तो अंतिम नियम जारी किए हैं और न ही कोई समयसीमा बताई है। इसलिए निवेशकों को यह नहीं मानना चाहिए कि कल से शॉर्ट सेलिंग के नियम बदल गए हैं या कोई नई सुविधा तुरंत शुरू हो गई है। औपचारिक नियम आने तक मौजूदा व्यवस्था ही लागू रहेगी।

अभी क्या तय नहीं हुआ

रिपोर्टों के अनुसार, यह समीक्षा ऐसे समय हो रही है जब सेबी का जेन स्ट्रीट के खिलाफ मामला भी चर्चा में है। सेबी ने जेन स्ट्रीट पर बैंक निफ्टी सूचकांक में हेरफेर का आरोप लगाया है, जिसमें नकदी, वायदा और विकल्प बाजार में सौदों का जिक्र है। यह मामला अभी आरोपों के स्तर पर है और इस समीक्षा को सीधे तौर पर उस मामले का नतीजा बताना सही नहीं होगा। लेकिन यह साफ है कि बाजार की निगरानी और सुरक्षा सेबी की प्राथमिकता में ऊपर है।

आने वाले महीनों में निवेशकों को सेबी के मसौदा नियमों और सलाह-मशविरे पर नजर रखनी चाहिए। अगर आप शेयर बाजार में नए हैं, तो शॉर्ट सेलिंग जैसे जोखिम भरे सौदों से दूर रहना ही समझदारी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इस समीक्षा का सबसे बड़ा फायदा यही होगा कि बाजार ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बने।

स्रोत: Telegraph India, Economic Times

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