भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Agreement) अब लगभग तैयार है — यह कोई अटकल नहीं, खुद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के शब्द हैं। 20 अक्टूबर को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक से पहले रुबियो ने कहा कि दोनों देश उस स्थिति में हैं, जहां "साइन किए गए समझौते के बिना जितना करीब हुआ जा सकता है, उतने करीब" हैं।
रुबियो ने क्या कहा
मीडिया से बातचीत में रुबियो ने कहा कि अब "सिर्फ कुछ मुद्दे" ही बाकी रह गए हैं, जिन्हें जल्द सुलझा लिया जाएगा। "मुझे लगता है कि यह जल्द ही होगा... हमें उम्मीद है कि काफी जल्द कोई अच्छी खबर सामने आएगी और उसके बाद नेता इस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं," उन्होंने कहा। उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय सीधे व्यापार समझौते की वार्ता नहीं करता, लेकिन वह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार इस प्रक्रिया पर करीबी नजर रखे हुए हैं और दोनों इसका समर्थन करते हैं।
ऊर्जा और रक्षा: साझेदारी का नया मोर्चा
रुबियो ने भारत को कच्चे तेल के शोधन का "सुपरपावर" बताते हुए कहा कि भारत में वेनेजुएला के कच्चे तेल के शोधन की बड़ी क्षमता है। उन्होंने नई दिल्ली से अमेरिकी ऊर्जा आयात बढ़ाने और अमेरिकी प्रौद्योगिकी व रक्षा प्रणालियों की खरीद बढ़ाने का आह्वान किया। रिपोर्टों के अनुसार, 21 अक्टूबर को रुबियो गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनरी का दौरा करने वाले हैं।
यह बैठक टैरिफ और आप्रवासन नीतियों को लेकर बने तनाव की पृष्ठभूमि में हुई है। रुबियो की यह पांच महीनों के भीतर दूसरी भारत यात्रा है, जो रिश्तों को पटरी पर लाने की अमेरिकी कोशिशों का संकेत मानी जा रही है। भारत हाल के महीनों में अन्य व्यापार समझौतों पर भी आगे बढ़ा है — जैसे न्यूज़ीलैंड के साथ हाल में लागू हुआ मुक्त व्यापार समझौता।
26/11 शहीदों को श्रद्धांजलि
जयशंकर से मुलाकात से पहले रुबियो ने ताज होटल स्थित 26/11 स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया। नवंबर 2008 के मुंबई हमलों में 166 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार, यह कदम आतंकवाद के खिलाफ भारत-अमेरिका की एकजुटता का प्रतीक माना जा रहा है।
चुनाव आयोग विवाद पर टिप्पणी, कांग्रेस का पलटवार
भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर पूछे गए सवाल पर रुबियो ने इसे "घरेलू राजनीतिक मामला" बताया और कहा कि इसका फैसला भारत की जनता को ही करना चाहिए। इस टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी — रिपोर्टों के अनुसार पार्टी की ओर से कहा गया, "Who cares what the White Man has to say about our protests?" (हमारे विरोध प्रदर्शनों पर 'व्हाइट मैन' की राय की किसे परवाह है?)। विदेशी टिप्पणियों पर भारत पहले भी सख्त रुख अपनाता रहा है — हाल में ही भारत ने कश्मीर पर OIC के प्रस्ताव को सिरे से खारिज किया था।
कुल मिलाकर, मुंबई की बैठक से यह साफ संदेश गया है कि व्यापार समझौता अब महज औपचारिकताओं से दूर है। रिपोर्टों के अनुसार रुबियो ने "काफी जल्द अच्छी खबर" की उम्मीद जताई है, और दोनों पक्षों ने ऊर्जा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि अंतिम घोषणा कब होती है।
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