Sirpur and 2 Andaman Sites Enter UNESCO's Tentative World Heritage List: What Happens Next

20 अक्टूबर, 2026 को भारत ने UNESCO की विश्व धरोहर की दौड़ में तीन नए कदम बढ़ाए। पेरिस स्थित भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि तीन भारतीय स्थलों को UNESCO विश्व धरोहर सम्मेलन की अस्थायी सूची (टेंटेटिव लिस्ट) में शामिल किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, ये प्रस्ताव 28 सितंबर, 2026 को भेजे गए थे और अब तीनों स्थल औपचारिक रूप से विश्व धरोहर बनने की प्रक्रिया में प्रवेश कर गए हैं।

यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत के पास पहले से 45 विश्व धरोहर स्थल हैं — 37 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित। जुलाई 2026 में सारनाथ के जुड़ने के बाद भारत का कद और बढ़ा है, और अब अस्थायी सूची में कुल 81 स्थल हो गए हैं।

लेकिन साफ समझ लें: अस्थायी सूची में आना विश्व धरोहर का दर्जा मिलना नहीं है — यह सिर्फ पहला दरवाजा है। आइए जानते हैं ये तीन स्थल कौन-से हैं और आगे क्या होगा।

सिरपुर शैली के प्राचीन ईंट-निर्मित मंदिर सूर्योदय के समय — महानदी तट पर पुरातात्विक परिदृश्य, जो UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल हुआ है

तीनों स्थल कौन-से हैं?

रिपोर्टों के अनुसार, तीनों नए नाम हैं: बरातांग का कार्स्ट-मड-वोल्कैनो परिसर, अंडमान सबडक्शन ज्वालामुखी (नारकोंडम और बैरन द्वीप) — ये दोनों अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में हैं — और छत्तीसगढ़ का सिरपुर सांस्कृतिक और पुरातात्विक परिदृश्य। इनमें दो प्राकृतिक और एक सांस्कृतिक श्रेणी का स्थल है।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्थल को विश्व धरोहर सूची के लिए नामांकित करने से पहले उसका अस्थायी सूची में होना अनिवार्य है। साथ ही इस प्रक्रिया में दस्तावेज़ तैयार करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के कार्य की सराहना की गई।

सिरपुर: पाँचवीं से बारहवीं सदी तक की राजधानी

सबसे ज़्यादा चर्चा में है छत्तीसगढ़ के महासमुंद ज़िले का सिरपुर। यह रायपुर से लगभग 75 किलोमीटर दूर, महानदी के पूर्वी तट पर बसा है। प्राचीन काल में इसे श्रीपुर कहा जाता था और 5वीं से 12वीं सदी ईस्वी के बीच यह दक्षिण कोसल की राजधानी रहा — एक ऐसा शहर जो धर्म, व्यापार, स्थापत्य और विद्या का बड़ा केंद्र था।

सिरपुर की सबसे बड़ी खूबी है हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं का एक साथ पनपना — मंदिर, विहार और स्तूप एक ही शहरी परिदृश्य में मौजूद हैं। प्रस्तावित मुख्य क्षेत्र में नौ प्रमुख स्थल हैं, जिनमें ईंटों से बना लक्ष्मण मंदिर (लगभग 7वीं सदी), राम मंदिर, गंधेश्वर मंदिर और कई विहार शामिल हैं।

SSADA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धम्मशील गनवीर के अनुसार, इससे पर्यटन बढ़ेगा और सिरपुर वैश्विक मानचित्र पर आएगा। ASI रायपुर सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् एम. कलिमुथु ने बताया कि अब उनके पास विस्तृत नामांकन दस्तावेज़ तैयार करने के लिए एक साल का समय है।

अंडमान के दो प्राकृतिक चमत्कार

दोनों प्राकृतिक स्थल अंडमान सागर की भूवैज्ञानिक विरासत को दर्शाते हैं — बरातांग का कार्स्ट-मड-वोल्कैनो परिसर अपनी चूना-पत्थर की गुफाओं और मड-वोल्कैनो (कीचड़ ज्वालामुखी) के लिए जाना जाता है, जबकि अंडमान सबडक्शन ज्वालामुखी में बैरन द्वीप और नारकोंडम द्वीप — दो ज्वालामुखीय द्वीप — शामिल हैं।

अस्थायी सूची से विश्व धरोहर तक का सफर

यहाँ से आगे का रास्ता तयशुदा प्रक्रिया से होकर गुज़रता है। ASI के एक अधिकारी के अनुसार, सबसे पहले विस्तृत नामांकन दस्तावेज़ (डॉसियर) तैयार होगा, जिसमें बफर ज़ोन, संरक्षण योजनाएँ, प्रबंधन प्रणाली, उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य (Outstanding Universal Value — OUV), प्रामाणिकता और अखंडता का औचित्य शामिल होगा।

डॉसियर जमा होने के बाद भारत UNESCO/ICOMOS/IUCN के सलाहकार मिशन को स्थल का दौरा करने के लिए आमंत्रित कर सकता है। जनभागीदारी और हितधारकों से परामर्श नामांकन को मज़बूत करता है। फिर भारत में तकनीकी समीक्षाओं के बाद दस्तावेज़ UNESCO के विश्व धरोहर केंद्र को भेजा जाता है, जहाँ विशेषज्ञ समिति मूल्यांकन करती है और अंततः विश्व धरोहर समिति फैसला लेती है।

OUV यानी वह गुण जो स्थल को पूरी मानवता के लिए असाधारण महत्व का बनाता है — यही वह कसौटी है जिस पर हर दावेदार को खरा उतरना होता है।

हमारा विश्लेषण: यह सिर्फ तीन नामों की बढ़ोतरी नहीं है — सिरपुर का चयन बताता है कि भारत अब प्रसिद्ध स्मारकों से आगे बहु-धर्मी शहरी परिदृश्यों जैसी जटिल विरासत को दुनिया के सामने रख रहा है, और अंडमान के दोनों स्थल भारत की भूवैज्ञानिक विविधता को वैश्विक मंच दे रहे हैं।

अब सबकी नज़र ASI के एक साल के डॉसियर पर होगी — अगर दस्तावेज़ मज़बूत बना, तो ये तीनों स्थल आने वाले वर्षों में भारत की गिनती बढ़ा सकते हैं। भारत की विरासत से जुड़ी और कहानियों के लिए ग्लोबल इनसाइट पर दुर्गा पूजा 2026 की कथा भी पढ़ें।

इस घोषणा की विस्तृत जानकारी द टाइम्स ऑफ इंडिया और सिरपुर पर विशेष रिपोर्ट इंडियन एक्सप्रेस में पढ़ी जा सकती है।

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