दिल्ली का रविवार दो प्रतिद्वंद्वी मार्चों के नाम रहा। एक तरफ रामलीला मैदान में इंडिया ब्लॉक की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली हुई, जिसमें राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जेल भेजने की चेतावनी दी। दूसरी तरफ पश्चिम दिल्ली में भाजपा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस से माफी मांगने के लिए मार्च निकाला। दोनों आयोजनों ने राजधानी की सियासत को एक ही दिन में दो ध्रुवों पर खड़ा कर दिया।
रामलीला मैदान में क्या हुआ: राहुल, खरगे और ममता के तीखे भाषण
इंडिया ब्लॉक के नेता खुले बसों में मिंटो रोड होते हुए रामलीला मैदान पहुंचे। यह रैली शनिवार को हुई सीईसी की 'सार्वजनिक महाभियोग' कार्यवाही के अगले दिन आयोजित की गई थी, जिसमें चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठाए गए थे।
रैली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाएगा और 'वोट चोरी' के लिए भविष्य में 'देशद्रोह' के आरोप में जेल भेजा जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी और वे कानून से बच नहीं पाएंगे। गांधी ने कहा कि देश के युवा, किसान और मजदूरों ने तय कर लिया है कि भारत में लोकतंत्र और संविधान को नष्ट नहीं होने दिया जाएगा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री यह तय कर रहे हैं कि कौन वोट डालेगा, और जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, विपक्ष चुप नहीं बैठेगा। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने सीईसी पर तंज कसते हुए पूछा, 'ज्ञानेश, तुम कब गायब होगे?' और आरोप लगाया कि बंगाल एसआईआर के तहत पीड़ित हुआ है। मंच पर अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला, रेवंत रेड्डी, अभिषेक बनर्जी और डी. राजा भी मौजूद थे। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि रैली से दिल्ली के व्यापारियों को फायदा होगा, क्योंकि प्रतिभागी स्थानीय दुकानों से खरीदारी करेंगे — यह राहुल गांधी की शनिवार की वीडियो अपील के अनुरूप था।
भाजपा का जवाबी मार्च: 1984 की याद और माफी की मांग
उसी दिन पश्चिम दिल्ली के हरि नगर से तिलक नगर तक भाजपा का मार्च निकला। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नेतृत्व में इस मार्च में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फूलका शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस और राहुल गांधी से 1984 के दंगों के लिए माफी मांगने की मांग की।
पुरी ने कहा कि 1984 की हिंसा कोई सहज दंगा नहीं, बल्कि 'सुविचारित नरसंहार' था। उन्होंने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में 2,733 सिख मारे गए थे। भाजपा नेताओं ने इंडिया ब्लॉक की रैली की तारीख पर भी सवाल उठाया — उनका कहना था कि 1 नवंबर 1984 को ही सिखों के खिलाफ हिंसा शुरू हुई थी, इसलिए उसी दिन रैली करना सिख समुदाय की भावनाओं का अपमान है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया पर लिखा कि देश 1 नवंबर की तारीख भूला नहीं है। दिल्ली भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने दावा किया कि रामलीला मैदान खाली रहा और रैली में 25,000 लोग भी नहीं जुटे — यह भाजपा का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दोनों पक्षों के दावे, और आगे क्या
दिन की सबसे अहम बात यह रही कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ सीधे आरोप लगाए, लेकिन किसी भी पक्ष के भीड़ के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इंडिया ब्लॉक ने सीईसी के इस्तीफे और एसआईआर पर रोक की मांग दोहराई है, जबकि भाजपा ने 1984 के लिए माफी की मांग को आगे बढ़ाया है। रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने मैदान तक मार्च की अनुमति नहीं दी थी, फिर भी नेता बसों में मैदान पहुंचे।
आगे की नजर एसआईआर की समयसीमा और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर रहेगी। इंडिया ब्लॉक की यह रैली 31 अक्टूबर की 'सार्वजनिक महाभियोग' कार्यवाही की अगली कड़ी थी, और विपक्ष ने संकेत दिया है कि 'वोट चोरी' का मुद्दा वह देश के सामने रखता रहेगा। भाजपा की ओर से भी 1984 के मुद्दे को लेकर दबाव जारी रहने की संभावना है।
स्रोत: ईटीवी भारत, टाइम्स नाउ
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