भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 31 अक्टूबर को जारी अपने नवंबर 2026 के मासिक पूर्वानुमान में साफ संकेत दिया है: नवंबर देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्म और सामान्य से कम बारिश वाला रहेगा। पूरे देश में नवंबर की बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) की सिर्फ 77 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यानी सर्दी की शुरुआत गर्म दिनों के साथ होगी, और दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून भी कमजोर रहने की आशंका है।
तापमान: दिन और रात दोनों सामान्य से गर्म
आईएमडी के अनुसार, नवंबर में देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान (दिन का तापमान) सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। अपवाद सिर्फ हिमालय की तलहटी के कुछ इलाके हैं, जहां सामान्य से कम अधिकतम तापमान रह सकता है। न्यूनतम तापमान (रात का तापमान) भी देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक रहेगा, हालांकि मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम न्यूनतम तापमान की संभावना है।
यह पूर्वानुमान अक्टूबर के रिकॉर्ड के बाद आया है। आईएमडी के अनुसार, अक्टूबर 2026 में देश का औसत अधिकतम तापमान 1901 के बाद से सबसे अधिक दर्ज किया गया, जबकि औसत तापमान तीसरा सबसे अधिक रहा। दक्षिणी प्रायद्वीप के लिए अक्टूबर 1901 के बाद से सबसे गर्म रहा, जिसमें औसत तापमान सामान्य से 1.17 डिग्री सेल्सियस अधिक था।
बारिश: कहां कम, कहां सामान्य से अधिक
बारिश के मोर्चे पर तस्वीर दो हिस्सों में बंटी है। देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, पूर्वोत्तर राज्यों, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और गुजरात के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।
दक्षिणी प्रायद्वीप — तमिलनाडु, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक — में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। इस क्षेत्र का नवंबर का एलपीए 118.7 मिमी है, और आईएमडी को उम्मीद है कि बारिश इसके 77 प्रतिशत से कम रहेगी। पूरे देश का नवंबर एलपीए (1971-2020 के आधार पर) लगभग 29.7 मिमी है। उत्तर-पूर्वी मानसून भी कमजोर रहने की संभावना है, जो दक्षिण भारत की नवंबर की बारिश का मुख्य स्रोत है।
वजह: बहुत मजबूत अल-नीनो, और इसका क्या मतलब है
आईएमडी ने इस पैटर्न की मुख्य वजह भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मौजूद बहुत मजबूत अल-नीनो स्थितियों को बताया है। मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम और अन्य वैश्विक मॉडलों के अनुसार, ये स्थितियां नवंबर-दिसंबर तक बनी रह सकती हैं, और नवंबर में इनकी तीव्रता चरम पर पहुंच सकती है। अल-नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का सतही पानी सामान्य से गर्म रहता है, जिससे वैश्विक वर्षा और तापमान के पैटर्न में बदलाव आता है। हिंद महासागर डाइपोल के तटस्थ रहने की संभावना है।
यहां एक महत्वपूर्ण बारीकी समझना जरूरी है: मासिक पूर्वानुमान किसी एक चक्रवात या निम्न दबाव प्रणाली की भविष्यवाणी नहीं कर सकता। यानी नवंबर का 'कम बारिश' वाला समग्र अनुमान इस बात से अलग है कि चक्रवात मुरासु जैसे किसी एक तूफान से आंध्र तट पर भारी बारिश हो सकती है। किसानों और शहरों के लिए इसका मतलब है — महीने भर की तस्वीर सूखी और गर्म है, लेकिन किसी एक मौसम प्रणाली से स्थानीय स्तर पर भारी बारिश से इनकार नहीं किया जा सकता।
किसके लिए क्या मायने: किसान, शहर और स्वास्थ्य
किसानों के लिए कम बारिश का मतलब है कि रबी की बुवाई के लिए सिंचाई पर निर्भरता बढ़ सकती है, खासकर दक्षिणी प्रायद्वीप में जहां उत्तर-पूर्वी मानसून कमजोर रहने की आशंका है। शहरों में गर्म दिनों का मतलब है कि नवंबर की शुरुआत में भी गर्मी से राहत कम मिलेगी — दिल्ली जैसे शहरों में यह सर्दियों के प्रदूषण के मौसम के साथ मिलकर हवा की गुणवत्ता की चुनौती बढ़ा सकता है। बुजुर्गों और बच्चों को दिन के समय गर्मी से बचाव की सलाह दी जाती है, हालांकि यह सामान्य जानकारी है, चिकित्सा सलाह नहीं।
आईएमडी का पूर्वानुमान हर महीने अपडेट होता है, इसलिए नवंबर के मध्य में जारी होने वाला अगला अपडेट तस्वीर को और साफ करेगा। तब तक के लिए संदेश साफ है: गर्म और सूखा नवंबर, अल-नीनो के असर के साथ।
स्रोत: द टेलीग्राफ, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस
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