पंजाब के खन्ना से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एक शिवसेना नेता के घर लगे कैमरे की फुटेज में कथित तौर पर एक सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) को गद्दे के नीचे कुछ रखते हुए देखा गया। बाद में पुलिस ने उसी जगह से हेरोइन बरामद होने का दावा किया और नेता को गिरफ्तार कर लिया। फुटेज के सार्वजनिक होने पर मामला पलट गया — एएसआई निलंबित हुए, नेता को मामले से बरी किया गया और जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित हुआ।
सीसीटीवी फुटेज में क्या दिखा
खबरों के अनुसार, खन्ना में शिवसेना नेता महंत कश्मीर गिरी के घर के अंदर लगे कैमरे की फुटेज में सादे कपड़ों में एक व्यक्ति कमरे में आता दिखाई देता है। रिपोर्टों में कहा गया है कि वह व्यक्ति एएसआई सुखदेव सिंह था, जो खन्ना सीआईए में तैनात था। फुटेज में कथित तौर पर वह बिस्तर के गद्दे के नीचे कुछ रखता है और चला जाता है। इसके बाद पुलिस की टीम घर पहुंची और उसी गद्दे के नीचे से लगभग 30 ग्राम हेरोइन बरामद होने का दावा किया। फिर गिरी को नशा तस्करी के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।
यहां एक बात साफ रखना जरूरी है: फुटेज में क्या रखा गया, यह अभी जांच का विषय है, और किसी अदालत या जांच समिति ने अब तक अंतिम फैसला नहीं दिया है। इसलिए इस लेख में 'कथित तौर पर' और 'रिपोर्टों के अनुसार' जैसे शब्द जानबूझकर इस्तेमाल किए गए हैं।
एसएसपी की कार्रवाई: निलंबन और एसआईटी जांच
फुटेज के वायरल होने के बाद खन्ना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. दर्पण अहलूवालिया ने तेजी से कार्रवाई की। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, एसएसपी ने एएसआई सुखदेव सिंह को निलंबित कर दिया और महंत कश्मीर गिरी को मामले से बरी कर दिया। साथ ही, पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित की गई है, जो मामले के सभी पहलुओं और छापेमारी में शामिल अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगी। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार भी निलंबन और एसआईटी जांच की पुष्टि हुई है, और समानांतर विभागीय जांच भी चल रही है।
निलंबन सजा नहीं, जांच के दौरान उठाया गया प्रशासनिक कदम है — अधिकारी पद से हटे हैं, लेकिन आरोप अभी साबित नहीं हुआ है। इसलिए एसआईटी की रिपोर्ट ही इस मामले का सबसे अहम दस्तावेज होगी।
ड्राइवर की गिरफ्तारी से शुरू हुआ मामला
रिपोर्टों के अनुसार, यह पूरा मामला गिरी के ड्राइवर गुरजंत सिंह उर्फ जंता की गिरफ्तारी से जुड़ा है। खन्ना सदर थाने में दर्ज प्राथमिकी में कहा गया था कि ड्राइवर के पास से 7.5 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। इसके बाद पुलिस गिरी के घर पहुंची, जहां गद्दे के नीचे से लगभग 30 ग्राम हेरोइन मिलने का दावा किया गया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, गिरी पर पहले से भी कई मामले दर्ज हैं, पर इससे नए आरोप सही नहीं हो जाते।
क्यों अहम है यह मामला
नशे के खिलाफ अभियान में पुलिस की साख सबसे बड़ी पूंजी होती है। जब छापेमारी और बरामदगी की प्रक्रिया पर ही सवाल उठ जाए, तो उसका असर सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं रहता — वह हर उस कार्रवाई पर शक पैदा करता है, जिसमें बरामदगी ही मुख्य सबूत हो। इसलिए एसआईटी की जांच यह भी तय करेगी कि भविष्य की छापेमारियों में कैमरे और स्वतंत्र गवाहों की व्यवस्था कितनी मजबूत हो। इस घटना ने यह भी दिखाया कि घर के अंदर लगा एक छोटा सा कैमरा किस तरह सत्ता के असंतुलन को पलट सकता है। हमारी पिछली रिपोर्टों — यूक्रेन के तेल रिफाइनरी हमले और अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट — में भी शुरुआती दावों के बाद जांच ने तस्वीर बदली थी।
निष्कर्ष
खन्ना का यह मामला अभी अधूरा है। निलंबन हो चुका है, एसआईटी बन चुकी है और नेता को मामले से बरी किया जा चुका है — लेकिन असली सवाल अब भी जांच की रिपोर्ट पर टिका है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पुलिस व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी होगी। अगर जांच में कुछ और सामने आता है, तो वह भी उतनी ही पारदर्शिता से सार्वजनिक होना चाहिए। तब तक, इस मामले को किसी एक वीडियो के आधार पर अंतिम सत्य मान लेना जल्दबाजी होगी — लेकिन इसे हल्के में लेना भी उतनी ही बड़ी गलती होगी।
