प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर को भुवनेश्वर में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 169 करोड़ रुपये के डेटा केंद्र और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन किया। यह परिसर जतनी के इन्फो वैली-द्वितीय में 18.55 एकड़ में फैला है। उद्घाटन के मौके पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा, ओडिशा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी मौजूद थे।
इस डेटा केंद्र में क्या होगा
रिपोर्टों के अनुसार, यह डेटा केंद्र आरबीआई की मिशन-महत्वपूर्ण भुगतान और निपटान प्रणालियों तथा अन्य प्रमुख पहलों को संभालेगा। इसका मकसद डिजिटल वित्तीय सेवाओं की पहुंच, दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाना है। आम लोगों की भाषा में कहें तो जब आप ऑनलाइन भुगतान करते हैं, तो उसके पीछे कंप्यूटरों का एक बड़ा और सुरक्षित ढांचा काम करता है। यह नया केंद्र उसी ढांचे को मजबूत करेगा, ताकि भुगतान प्रणाली बिना रुकावट चल सके।
इस परियोजना की आधारशिला 22 मार्च 2023 को तत्कालीन आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने रखी थी। यानी यह कोई अचानक घोषित परियोजना नहीं है, बल्कि तीन साल से अधिक समय से बन रहा ढांचा है जो अब शुरू हुआ है। जगह का चुनाव भी सोच-समझकर किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह स्थान भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों और उच्च जोखिम वाले अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों से दूर है, जिससे प्राकृतिक आपदा और भू-राजनीतिक खतरे से इसका जोखिम कम रहता है।
साइबर सुरक्षा संस्थान क्यों बनाया गया है
डेटा केंद्र के साथ बना साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान वित्तीय क्षेत्र के लिए क्षमता निर्माण का काम करेगा। रिपोर्टों के अनुसार, यह संस्थान साइबर सुरक्षा और उद्यम तकनीक के प्रशिक्षण, शोध और क्षेत्र-स्तरीय क्षमता विकास के लिए एक समर्पित मंच देगा। बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अब सिर्फ सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि प्रशिक्षित लोग भी चाहिए जो हमलों को पहचान सकें और उनसे निपट सकें।
प्रधानमंत्री ने उद्घाटन के मौके पर कहा कि भविष्य के युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि किसी देश की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाकर भी लड़े जा सकते हैं। उनका कहना था कि जैसे-जैसे भारत आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है, बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी होती जा रही है। पुरानी प्रणालियां और पारंपरिक प्रशिक्षण के तरीके नई चुनौतियों से निपटने के लिए काफी नहीं होंगे।
बैंकिंग के अगले दशक की दिशा क्या है
मोदी ने कहा कि पिछला दशक बैंकिंग को उन लोगों तक पहुंचाने का था जो इससे बाहर थे। आने वाला दशक बैंकिंग को ज्यादा कुशल और विश्वसनीय बनाने का होगा। यह बयान इस परियोजना की सोच को साफ करता है। अब सवाल सिर्फ खाता खोलने का नहीं है, बल्कि यह है कि डिजिटल भुगतान हर समय, सुरक्षित तरीके से और बिना रुकावट चलता रहे।
ओडिशा के लिए भी यह परियोजना अहम है। भुवनेश्वर में आरबीआई का इतना बड़ा तकनीकी परिसर बनने से राज्य वित्तीय तकनीक के नक्शे पर मजबूत जगह बनाता है। साथ ही, साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण से स्थानीय युवाओं के लिए भी नई कौशल-आधारित नौकरियों के रास्ते खुल सकते हैं, हालांकि इस बारे में कोई निश्चित संख्या अभी घोषित नहीं की गई है।
आम उपभोक्ता के लिए इसका क्या मतलब है
आम उपभोक्ता को इस उद्घाटन का असर सीधे किसी नए ऐप या सुविधा के रूप में नहीं दिखेगा। इसका असर पर्दे के पीछे होगा। भुगतान प्रणाली का मजबूत बैकअप होने से लेनदेन के रुकने की संभावना कम होती है और साइबर हमलों से निपटने की तैयारी बेहतर होती है। डिजिटल अर्थव्यवस्था में भरोसा ही सबसे बड़ी पूंजी है, और यह केंद्र उसी भरोसे को मजबूत करने की कोशिश है।
स्रोत: बिजनेस स्टैंडर्ड, एनडीटीवी। और पढ़ें: सेबी की शॉर्ट-सेलिंग नियमों की समीक्षा, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता।
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